All Exams Test series for 1 year @ ₹349 only
Question

निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए । 

भारतीय साहित्य के क्षेत्र में सर्वप्रथम सैद्धान्तिक आलोचना का विकास हुआ जिसे 'काव्य-शास्त्र' या 'अलंकार-शास्त्र' के नाम से पुकारा जाता रहा है । उपलब्ध ग्रंथों में प्राचीनतम रचना भरतमुनि द्वारा रचित 'नाट्य-शास्त्र' है जिसमें साहित्य के मानदण्ड के रूप में 'रस-सिद्धान्त' की प्रतिष्ठा की गई है । साहित्य का मूल तत्व भाव है: रस-सिद्धान्त की भाव और भावनाओं के उद्वेलन की प्रक्रिया का स्पष्टीकरण करता हुआ साहित्य की विषय-वस्तु का वर्गीकरण एवं विश्लेषण प्रस्तुत करता है : काव्य में भाव तत्व को सर्वाधिक महत्व प्रदान करके रस-सिद्धान्त के आचार्यों ने एक उचित दिशा में काव्य-शास्त्र को आगे बढाया । भारत के परवर्ती आचार्यों में से अनेक ने रस-सिद्धान्त के विभिन्न अस्पष्ट स्थलों की विस्तृत व्याख्या की, विशेषतः रस-निष्पत्ति की समस्या को लेकर भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्टनायक, अभिनव गुप्त, पंडितराज जगन्नाथ आदि ने अपने-अपने स्वतंत्र मत की प्रतिष्ठा की । आगे चलकर भामह, उद्भट, दण्डी आदि आचार्यों ने रस के स्थान पर काव्य की आत्मा के रूप में 'अलंकार' की प्रतिष्ठा की । अलंकार के सम्बन्ध में उनकी धारणाएँ बहुत व्यापक थीं, वे उसे 'सौन्दर्य' के पर्यायवाची के रूप में ग्रहण करते थे । परवर्ती युग में वामन के द्वारा 'रीति-सम्प्रदाय' की, कुंतक के द्वारा 'वक्रोक्ति सम्प्रदाय' की तथा आनन्द वर्द्धनाचार्य द्वारा 'ध्वनि सम्प्रदाय' की प्रतिष्ठा हुई, जिन्होंने क्रमशः रीति, वक्रोक्ति एवं ध्वनि को काव्य की आत्मा के रूप में स्वीकार किया । क्षेमेन्द्र ने इन सभी के उचित प्रयोग को महत्वपूर्ण मानते हुए 'औचित्य सम्प्रदाय' की स्थापना की । मम्मट, विश्वनाथ, पंडितराज जगन्नाथ आदि व्याख्याताओं ने क्षेमेन्द्र के दृष्टिकोण को अपनाते हुए अपने काव्य-शास्त्रीय ग्रंथों में रस, अलंकार, रीति, ध्वनि, वक्रोक्ति आदि सभी का विवेचन किया है ।

परवर्ती युग में वामन द्वारा 'रीति-संप्रदाय' की, कुंतक के द्वारा 'वक्रोक्ति संप्रदाय' की तथा आनंद वर्द्धनाचार्य द्वारा किस संप्रदाय की प्रतिष्ठा हुई ?

This question was previously asked in
UPSSSC PET 2025 Question Paper (07-Sep-2025) (Shift-2)
The correct answer is

ध्वनि

आनंद वर्द्धनाचार्य ने 'ध्वनि-संप्रदाय' की स्थापना की। गद्यांश में दिए गए विवरण के आधार पर, आनंद वर्द्धनाचार्य द्वारा स्थापित संप्रदाय 'ध्वनि-संप्रदाय' था। यह काव्य की आत्मा के रूप में 'ध्वनि' के महत्व को स्वीकार करता है।

Was this answer helpful?

Similar Questions

  1. निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए । 

    आज हिंदी भाषा जिस रूप में बोली और समझी जाती है वह खड़ी बोली का ही साहित्यिक भाषा रूप है. जिसका विकास मुख्यतः उन्नीसवीं शताब्दी मे हुआ । खडी बोली का प्राचीन रूप दसवीं शताब्दी से मिलता है किन्तु चौदहवीं शताब्दी के प्रारंभ में अमीर खुसरो ने पहली बार खड़ी बोली में कविता की रचना की। मध्यकाल तक खड़ी बोली मुख्यतः बोलचाल की भाषा के रूप में ही प्रचलित थी । उस युग में ब्रजभाषा और अवधी काव्य की भाषा थी । 

    ब्रजभाषा को सूरदास ने, अवधी को तुलसीदास ने और मैथिली को विद्यापति ने सिंचित और पल्लवित किया । उस समय फारसी राजदरबार में राजकाज की भाषा हुआ करती थी । अतः इन्हीं कारणों से खड़ी बोली उपेक्षित-सी रही, लेकिन समस्त उत्तर भारत में जनसंपर्क की यही एकमात्र सशक्त भाषा थी । 19 वीं और 20 वीं शताब्दी में जब ज्ञान-विज्ञान का प्रसार हुआ तो खड़ी बोली सहज रूप से सर्वग्राह्य भाषा के रूप में तथा जनसंपर्क की भाषा के रूप में उभर कर सामने आई क्योंकि यही सबसे अधिक व्यापक थी। 

    संसार में अंग्रेजी व चीनी भाषा के बाद हिंदी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है । मुद्रण के आविष्कार, भारत में में अंग्रेजी गद्य साहित्य के प्रसार, राजनीतिक जागरूकता के उद्भव, पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन, जनसाधारण तक पहुँचने की आवश्यकता आदि कारणों ने खड़ी बोली से विकसित हिंदी को सम्पूर्ण भारत की सर्वाधिक प्रयोग की जाने वाली जनसम्पर्क की भाषा के रूप में स्थापित कर दिया । इसी अवधि में भारतेन्दु हरिश्चंद्र महावीर प्रसाद द्विवेदी और प्रेमचन्द आदि ने हिंदी गद्य को निखारने व परिष्कृत करने में योगदान दिया । जन समुदायों को संबोधित करने के लिए गाँधी, तिलक, दयानन्द सरस्वती आदि राजनैतिक और धार्मिक नेताओं ने हिंदी का प्रयोग किया । 

    सन् 1949 ई. में संविधान में देश की राजभाषा के रूप में स्वीकृत होने के पश्चात् इसने अब एक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्थान प्राप्त कर लिया है । देश के अधिकतर राज्यों में शासन और शिक्षा की भाषा हिंदी है। पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र ने इसे द्वितीय भाषा के रूप में मान्यता दी है ।

  2. अंक में भरना' एक मुहावरा है, इसका सही अर्थ है
  3. इस उपन्यास में प्रभावती की नायिका होने पर भी उसकी तुलना में किसका चरित्र अधिक प्रभावशाली है ?
  4. प्रभावती किसके स्वयंवर के अवसर पर सशस्त्र सहायता देती है ?
  5. यमुना किससे प्रेम करती है ?
  6. प्रभावती एक वीर नारी की तरह राजकुमार के साथ ________________ विवाह करती है।

  7. प्रभावती' किसकी बेटी है ?
  8. भारत के परवर्ती आचार्यों ने विशेषतः ___________________ की समस्या को लेकर भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्टनायक, अभिनव गुप्त, पंडितराज जगन्नाथ आदि ने अपने-अपने स्वतंत्र मत की प्रतिष्ठा की ।

  9. उपलब्ध ग्रंथों में प्राचीनतम रचना भरतमुनि द्वारा रचित 'नाट्य-शास्त्र' है जिसमें साहित्य के मानदण्ड के रूप में किसकी प्रतिष्ठा की गई है ?
  10. भामह, उद्भट, दण्डी आदि आचार्यों ने रस के स्थान पर काव्य की आत्मा के रूप में किसकी प्रतिष्ठा की ?

Important Questions from Miscellaneous

  1. List-I with List-II:
    List-I
    (Relief Materials)
    List-II
    (Color Code)
    A. ShelterI. Yellow
    B. ClothesII. Khaki
    C. FoodIII. Red
    D. MedicineIV. Brown

    Choose the correct answer from the options given below:
  2. What was a key reform introduced by the Waqf (Amendment) Act, 2025?
  3. Which of the following is NOT a state function or state variable in a thermodynamic system?

  4. What is the full form for "BPL" in Socio-economic aspects?
  5. In October 2024, which of the following companies was awarded the contract for design, manufacturing and commissioning of two high-speed trainsets by Integral Coach Factory (ICF) to be used in India's first bullet train between Mumbai and Ahmedabad?
Need Expert Advice?
Upcoming Exams
SSC CPO
November 23, 2026
SSC CHSL
November 30, 2026
Test Series
UPSSSC PET img
State Exams
UPSSSC PET Mock Test Series 2026
341 Tests 7 Tests Free
4584 Attempts
4.7(184)
English, Hindi
More Questions from UPSSSC PET
1)

निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए । 

आज हिंदी भाषा जिस रूप में बोली और समझी जाती है वह खड़ी बोली का ही साहित्यिक भाषा रूप है. जिसका विकास मुख्यतः उन्नीसवीं शताब्दी मे हुआ । खडी बोली का प्राचीन रूप दसवीं शताब्दी से मिलता है किन्तु चौदहवीं शताब्दी के प्रारंभ में अमीर खुसरो ने पहली बार खड़ी बोली में कविता की रचना की। मध्यकाल तक खड़ी बोली मुख्यतः बोलचाल की भाषा के रूप में ही प्रचलित थी । उस युग में ब्रजभाषा और अवधी काव्य की भाषा थी । 

ब्रजभाषा को सूरदास ने, अवधी को तुलसीदास ने और मैथिली को विद्यापति ने सिंचित और पल्लवित किया । उस समय फारसी राजदरबार में राजकाज की भाषा हुआ करती थी । अतः इन्हीं कारणों से खड़ी बोली उपेक्षित-सी रही, लेकिन समस्त उत्तर भारत में जनसंपर्क की यही एकमात्र सशक्त भाषा थी । 19 वीं और 20 वीं शताब्दी में जब ज्ञान-विज्ञान का प्रसार हुआ तो खड़ी बोली सहज रूप से सर्वग्राह्य भाषा के रूप में तथा जनसंपर्क की भाषा के रूप में उभर कर सामने आई क्योंकि यही सबसे अधिक व्यापक थी। 

संसार में अंग्रेजी व चीनी भाषा के बाद हिंदी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है । मुद्रण के आविष्कार, भारत में में अंग्रेजी गद्य साहित्य के प्रसार, राजनीतिक जागरूकता के उद्भव, पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन, जनसाधारण तक पहुँचने की आवश्यकता आदि कारणों ने खड़ी बोली से विकसित हिंदी को सम्पूर्ण भारत की सर्वाधिक प्रयोग की जाने वाली जनसम्पर्क की भाषा के रूप में स्थापित कर दिया । इसी अवधि में भारतेन्दु हरिश्चंद्र महावीर प्रसाद द्विवेदी और प्रेमचन्द आदि ने हिंदी गद्य को निखारने व परिष्कृत करने में योगदान दिया । जन समुदायों को संबोधित करने के लिए गाँधी, तिलक, दयानन्द सरस्वती आदि राजनैतिक और धार्मिक नेताओं ने हिंदी का प्रयोग किया । 

सन् 1949 ई. में संविधान में देश की राजभाषा के रूप में स्वीकृत होने के पश्चात् इसने अब एक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्थान प्राप्त कर लिया है । देश के अधिकतर राज्यों में शासन और शिक्षा की भाषा हिंदी है। पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र ने इसे द्वितीय भाषा के रूप में मान्यता दी है ।

Start Your Preparation with Prepp Mobile App

Download the app from Google Play & App Store
Download the app from Google Play & App Store
Prepp Mobile App