निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए । हिंदी साहित्य में ग्रामांचलिकता की प्रवृत्ति स्वातंत्र्योत्तर काल में पनप उठी है । महात्मा गाँधीजी के 'देहात की ओर चलो' इस नारे के अनुकरण पर ग्रामांचलिक साहित्य का आंदोलन शुरू हुआ । ग्रामीण लोगों का प्रबोधन करके उनमें चेतना जगाने का काम ग्रामांचलिक लेखकों ने किया है । वहाँ के जन-जीवन की समस्याओं को लोगों के सामने रखने का उद्देश्य ग्रामांचलिक साहित्यकारों में रहा है । ग्रामांचलिक साहित्य का प्रारंभ सन् 1950 के पश्चात् अधिक गति से शुरू हुआ । ग्रामीण जीवन को सही अर्थ में मुखरित करने का सफल प्रयास प्रेमचंद ने किया । अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से इन्होंने ग्रामीण जीवन का मर्मस्पर्शी चित्रण किया है । प्रेमचंद के पूर्व काल में सेठ बाँकेमल के 'घराऊ घटना'-1883, 'वसंत मालती' - 1899, 'अधखिला फूल'-1907, 'भोजपुरी की ठगी'-1912, 'राधाकांत' और 'अरण्यक'-1915, मन्नन द्विवेदी द्वारा लिखित 'रामलाल'-1914, शिवपूजन सहाय द्वारा लिखित 'देहाती दुनिया'-1925 आदि उपन्यासों में प्रारंभिक स्तर पर ग्रामांचलिकता के दर्शन होते हैं । प्रेमचंद के 'रंगभूमि', 'गोदान', 'प्रेमाश्रम' आदि उपन्यासों में ग्रामीण जीवन, पीड़ित ग्रामीणों में उभरने वाली चेतना के दर्शन होते हैं । इनके उपन्यासों में नई सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था और परंपरागत ग्राम व्यवस्था के संक्रमण कालीन संदर्भ स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आए हैं। जयशंकर प्रसाद के 'तितली' में ग्राम जीवन की प्रवृत्तियों की ओर इशारा किया है । इसके बाद उदयशंकर भट्ट, अमृतलाल नागर, रांगेय राघव, देवेंद्र सत्यार्थी आदि इसी लीक पर चलते रहे, जिन्होंने ग्रामांचलिकता की मध्य स्थिति को अपनाया । हिंदी साहित्य में आँचलिकता के उन्नायक उपन्यासकार फणीश्वरनाथ 'रेणु' रहे हैं। उनके द्वारा लिखा गया पहला आँचलिक उपन्यास 'मैला आँचल'-1954, हिंदी का शुद्ध आँचलिक उपन्यास माना जाता है । इसके बाद आँचलिकता अधिक मात्रा में पनपती गई । आँचलिक साहित्य विविध रूपों में समृद्ध होता गया । इसका श्रेय शैलेश मटियानी, रांगेय राघव, रामदरश मिश्र, राही मासूम रजा, हिमांशु जोशी, भैरवप्रसाद गुप्त, जगदंबाप्रसाद, जगदीश गुप्त, अमृतलाल नागर, श्याम परमार, शिव प्रसाद सिंह, विवेकी राय आदि को दिया जा सकता है । सन् 1960 के पश्चात् ग्रामांचलिकधारा अधिक बलवती बनी । इसमें कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, रिपोर्ताज, रेखाचित्र आदि को यथावत स्थान प्राप्त हुआ ।
ग्रामांचलिक साहित्य का प्रारंभ सन् _______________________ अधिक गति से शुरू हुआ ।
यह प्रश्न हिंदी साहित्य में 'ग्रामांचलिकता' की प्रवृत्ति के प्रारंभ और गति से संबंधित है। गद्यांश में इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई है।
गद्यांश के अनुसार, हिंदी साहित्य में ग्रामांचलिकता की प्रवृत्ति स्वातंत्र्योत्तर काल में विकसित हुई। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण लोगों को जगाना और उनके जीवन की समस्याओं को सामने लाना था। गद्यांश स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है:
"ग्रामांचलिक साहित्य का प्रारंभ सन् 1950 के पश्चात् अधिक गति से शुरू हुआ।"
यह कथन दर्शाता है कि 1950 के बाद ग्रामांचलिक साहित्य ने अधिक तेज़ी पकड़ी और इसका विकास गतिमान हुआ।
उपरोक्त गद्यांश के आधार पर, यह स्पष्ट है कि ग्रामांचलिक साहित्य का प्रारंभ 1950 के पश्चात् अधिक गति से शुरू हुआ। इसलिए, विकल्प 1 सही उत्तर है।
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
आज हिंदी भाषा जिस रूप में बोली और समझी जाती है वह खड़ी बोली का ही साहित्यिक भाषा रूप है. जिसका विकास मुख्यतः उन्नीसवीं शताब्दी मे हुआ । खडी बोली का प्राचीन रूप दसवीं शताब्दी से मिलता है किन्तु चौदहवीं शताब्दी के प्रारंभ में अमीर खुसरो ने पहली बार खड़ी बोली में कविता की रचना की। मध्यकाल तक खड़ी बोली मुख्यतः बोलचाल की भाषा के रूप में ही प्रचलित थी । उस युग में ब्रजभाषा और अवधी काव्य की भाषा थी ।
ब्रजभाषा को सूरदास ने, अवधी को तुलसीदास ने और मैथिली को विद्यापति ने सिंचित और पल्लवित किया । उस समय फारसी राजदरबार में राजकाज की भाषा हुआ करती थी । अतः इन्हीं कारणों से खड़ी बोली उपेक्षित-सी रही, लेकिन समस्त उत्तर भारत में जनसंपर्क की यही एकमात्र सशक्त भाषा थी । 19 वीं और 20 वीं शताब्दी में जब ज्ञान-विज्ञान का प्रसार हुआ तो खड़ी बोली सहज रूप से सर्वग्राह्य भाषा के रूप में तथा जनसंपर्क की भाषा के रूप में उभर कर सामने आई क्योंकि यही सबसे अधिक व्यापक थी।
संसार में अंग्रेजी व चीनी भाषा के बाद हिंदी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है । मुद्रण के आविष्कार, भारत में में अंग्रेजी गद्य साहित्य के प्रसार, राजनीतिक जागरूकता के उद्भव, पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन, जनसाधारण तक पहुँचने की आवश्यकता आदि कारणों ने खड़ी बोली से विकसित हिंदी को सम्पूर्ण भारत की सर्वाधिक प्रयोग की जाने वाली जनसम्पर्क की भाषा के रूप में स्थापित कर दिया । इसी अवधि में भारतेन्दु हरिश्चंद्र महावीर प्रसाद द्विवेदी और प्रेमचन्द आदि ने हिंदी गद्य को निखारने व परिष्कृत करने में योगदान दिया । जन समुदायों को संबोधित करने के लिए गाँधी, तिलक, दयानन्द सरस्वती आदि राजनैतिक और धार्मिक नेताओं ने हिंदी का प्रयोग किया ।
सन् 1949 ई. में संविधान में देश की राजभाषा के रूप में स्वीकृत होने के पश्चात् इसने अब एक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्थान प्राप्त कर लिया है । देश के अधिकतर राज्यों में शासन और शिक्षा की भाषा हिंदी है। पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र ने इसे द्वितीय भाषा के रूप में मान्यता दी है ।
सन् ______________________ई. में संविधान में देश की राजभाषा के रूप में स्वीकृत होने के पश्चात् इसने अब एक राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्थान प्राप्त कर लिया है ।
संसार में अंग्रेजी व __________________भाषा के बाद हिन्दी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक है ।
नाच' तद्भव शब्द है, उसका तत्सम शब्द ______________है।
इंटरनेट क्रांति' निबंध में इंटरनेट के बारे में चर्चा की है, इंटरनेट का अर्थ ________________________ है।
अभिनेता' पुल्लिंग शब्द है, उसका स्त्रीलिंग रूप __________________ है।
जो विशेषण शब्द विशेषणों की विशेषता बताते हैं, उसे क्या कहते हैं ?
डंडा' तद्भव शब्द है, उसका तत्सम शब्द________________ है
The magazine in which Mahatma Gandhi mentioned what he wanted the Constitution to do is:
Which gas shields the surface of the earth from ultraviolet radiation from the sun?
Which event is marked as an Intangible Cultural Heritage of Humanity by UNESCO?
Who has been conferred with the rank of the Commander of the Order of the British Empire in 2018?
Who directead the film ‘Bhuvan Shome’?