रचनाकाल के अनुसार भारतेंदु के निम्न नाटकों का सही क्रम पहचानिए I
प्रश्न में भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित कुछ प्रमुख नाटकों का उल्लेख किया गया है और उनका सही रचनाकाल के अनुसार क्रम पूछा गया है। इन नाटकों के रचनाकाल को जानना क्रम निर्धारित करने के लिए आवश्यक है।
दिए गए नाटकों के रचनाकाल इस प्रकार हैं:
इन रचनाकालों के अनुसार, नाटकों का सही क्रम है:
हालांकि नीलदेवी और अंधेर नगरी दोनों 1881 ई. की रचनाएँ हैं, साहित्यिक इतिहास में अंधेर नगरी को प्रायः नीलदेवी के बाद स्थान दिया जाता है, या दोनों को एक ही वर्ष की महत्वपूर्ण रचनाएं माना जाता है। दिए गए विकल्पों में जो क्रम इस ऐतिहासिक मान्यता के सबसे करीब है, उसे पहचानना है।
विकल्पों का विश्लेषण:
उपरोक्त रचनाकालों के आधार पर, विकल्प 3 'भारत दुर्दशा, नीलदेवी, अंधेर नगरी, सती प्रताप' सही क्रम को दर्शाता है। भारत दुर्दशा (1880) सबसे पहले, उसके बाद नीलदेवी और अंधेर नगरी (1881) और अंत में सती प्रताप (1883)।
इसलिए, रचनाकाल के अनुसार भारतेंदु के नाटकों का सही क्रम भारत दुर्दशा, नीलदेवी, अंधेर नगरी, सती प्रताप है।
प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित उपन्यासों का सही अनुक्रम क्या है ?
(1) मानस का हंस
(2) पीढ़ियाँ
(3) खंजन नयन
(4) सुहाग के नूपुर
सही विकल्प चुनिए :
निम्नलिखित उपन्यासों के पात्रों का सही मिलान कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही विकल्प का चयन कीजिए:
a. | मैला आँचल | 1. | अमरपाल सिंह |
b. | नदी के द्वीप | 2. | डॉ० प्राणनाथ |
c. | गोदान | 3. | हरगौरी सिंह |
d. | झूठा सच | 4. | डॉ० भुवन |
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इस जनम में तो कोई आशा नहीं है भाई ! हम राज नहीं चाहते, भोग-विलास नहीं चाहते खाली मोटा-झोटा पहनना और मोटा-झोटा खाना, और मरजाद के साथ रहना चाहते हैं I वह भी नहीं सधता I' किस उपन्यास का वाक्य है?