मैथिलीशरण गुप्त की पहली काव्यकृति जो सन् 1909 ई. में प्रकाशित हुई थी, कौन-सी है?
रंग में भंग
यह प्रश्न हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण कवि, मैथिलीशरण गुप्त जी की प्रारंभिक काव्य यात्रा से संबंधित है। इसमें उनकी पहली प्रकाशित काव्यकृति के बारे में पूछा गया है, विशेष रूप से वह कृति जो सन् 1909 ई. में प्रकाशित हुई थी।
मैथिलीशरण गुप्त जी द्विवेदी युग के प्रमुख कवि थे और उन्हें 'राष्ट्रकवि' की उपाधि से सम्मानित किया गया है। उनका साहित्यिक जीवन काफी लंबा और समृद्ध रहा है। उनकी कृतियों में देशप्रेम, भारतीय संस्कृति और मानवीय भावनाओं का सुंदर चित्रण मिलता है।
प्रश्न स्पष्ट रूप से मैथिलीशरण गुप्त की 'पहली काव्यकृति' और उसके प्रकाशन वर्ष 'सन् 1909 ई.' पर केंद्रित है। हमें दिए गए विकल्पों में से उस कृति को पहचानना है जो इन दोनों शर्तों को पूरा करती हो।
दिए गए विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है:
उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि दिए गए विकल्पों में से 'रंग में भंग' ही मैथिलीशरण गुप्त की वह काव्यकृति है जो सन् 1909 ई. में प्रकाशित हुई थी और उनकी पहली प्रकाशित काव्यकृति के रूप में जानी जाती है।
मैथिलीशरण गुप्त की पहली काव्यकृति जो सन् 1909 ई. में प्रकाशित हुई थी, वह 'रंग में भंग' है। यह कृति राजपूत गौरव और आन-बान की कथा पर आधारित है।
| काव्यकृति | कवि | प्रकाशन वर्ष | महत्व/टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| रंग में भंग | मैथिलीशरण गुप्त | 1909 ई. | पहली प्रकाशित काव्यकृति |
| प्रतिध्वनि | जयशंकर प्रसाद | 1926 ई. | कहानी संग्रह |
| श्रृंगार लहरी | भारतेन्दु हरिश्चंद्र | अज्ञात (भारतेन्दु युग) | काव्यकृति |
| कुंकुम | बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' | 1936 ई. | काव्यकृति |
मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964) द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी से प्रेरणा पाकर उन्होंने खड़ी बोली हिंदी में कविताएं लिखना शुरू किया। उनकी प्रमुख कृतियों में 'भारत-भारती' (1912), 'साकेत' (1931), 'यशोधरा' (1932), 'द्वापर', 'जयद्रथ वध', 'पंचवटी' आदि शामिल हैं। 'भारत-भारती' ने राष्ट्रीय चेतना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण उन्हें राष्ट्रकवि के रूप में ख्याति मिली। 'साकेत' उनका महाकाव्य है जो उर्मिला के विरह पर केंद्रित है।
गुप्त जी ने भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुराणों से विषय उठाकर अपनी कविताओं में पिरोया। उनकी भाषा सरल, सहज और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें संस्कृत के तत्सम शब्दों का भी प्रयोग मिलता है। वे नैतिक मूल्यों और आदर्शों के कवि थे।
प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित उपन्यासों का सही अनुक्रम क्या है ?
(1) मानस का हंस
(2) पीढ़ियाँ
(3) खंजन नयन
(4) सुहाग के नूपुर
सही विकल्प चुनिए :
निम्नलिखित उपन्यासों के पात्रों का सही मिलान कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही विकल्प का चयन कीजिए:
a. | मैला आँचल | 1. | अमरपाल सिंह |
b. | नदी के द्वीप | 2. | डॉ० प्राणनाथ |
c. | गोदान | 3. | हरगौरी सिंह |
d. | झूठा सच | 4. | डॉ० भुवन |
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इस जनम में तो कोई आशा नहीं है भाई ! हम राज नहीं चाहते, भोग-विलास नहीं चाहते खाली मोटा-झोटा पहनना और मोटा-झोटा खाना, और मरजाद के साथ रहना चाहते हैं I वह भी नहीं सधता I' किस उपन्यास का वाक्य है?
रचनाकाल के अनुसार भारतेंदु के निम्न नाटकों का सही क्रम पहचानिए I