किस इतिहासकार ने हिन्दी साहित्य का प्रारंभ संवत् 1050 से माना है ?
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखते समय, विभिन्न विद्वानों और इतिहासकारों ने इसके प्रारंभ काल को लेकर अलग-अलग मत प्रस्तुत किए हैं। यह एक महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यह साहित्य की जड़ें और विकास की दिशा तय करता है। प्रश्न पूछता है कि किस प्रसिद्ध इतिहासकार ने हिन्दी साहित्य का प्रारंभ संवत् 1050 से माना है।
हिन्दी साहित्य का प्रारंभ किस काल से माना जाए, इस पर मतभेद रहा है। कई इतिहासकार हुए हैं जिन्होंने इस पर गहन शोध किया है। प्रस्तुत विकल्पों में दिए गए सभी नाम हिन्दी साहित्य के महत्वपूर्ण इतिहासकारों के हैं।
विभिन्न इतिहासकारों के मतों में से, वह इतिहासकार जिन्होंने स्पष्ट रूप से हिन्दी साहित्य का प्रारंभ संवत् 1050 (अर्थात् 993 ईस्वी) से माना है, वे हैं आचार्य रामचन्द्र शुक्ल। आचार्य शुक्ल ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' में इसी समय से 'आदिकाल' या 'वीरगाथा काल' का प्रारंभ माना है।
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने संवत् 1050 से संवत् 1375 तक के कालखंड को आदिकाल के रूप में वर्गीकृत किया है। उन्होंने इस काल में उपलब्ध सामग्री के आधार पर अपना मत स्थापित किया। उनका यह विभाजन और काल निर्धारण हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन में अत्यंत प्रभावशाली रहा है।
अन्य विकल्प जैसे ग्रियर्सन, हजारी प्रसाद द्विवेदी, और शिवसिंह सेंगर ने भी हिन्दी साहित्य के इतिहास पर कार्य किया है, लेकिन हिन्दी साहित्य का प्रारंभ संवत् 1050 से मानने का श्रेय विशेष रूप से आचार्य रामचन्द्र शुक्ल को जाता है। उनका यह निर्धारण आज भी कई अध्ययनों का आधार है और हिन्दी साहित्य का प्रारंभ समझने में मदद करता है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ही वह इतिहासकार हैं जिन्होंने हिन्दी साहित्य का प्रारंभ संवत् 1050 से माना है।
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