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Question

लिंक-स्टेट रूटिंग का प्राथमिक उद्देश्य क्या है ?

The correct answer is
प्रत्येक नोड को किसी भी गंतव्य के लिए सबसे कम लागत वाला मार्ग खोजने में सक्षम बनाना

लिंक-स्टेट रूटिंग का परिचय

लिंक-स्टेट रूटिंग (Link-State Routing) एक प्रकार की नेटवर्किंग प्रक्रिया है जिसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि डेटा पैकेट को स्रोत से गंतव्य तक भेजने के लिए सबसे अच्छा मार्ग कौन सा है। यह डिस्टेंस-वेक्टर रूटिंग जैसे अन्य प्रोटोकॉल से अलग तरीके से काम करता है।

लिंक-स्टेट रूटिंग का प्राथमिक उद्देश्य

लिंक-स्टेट रूटिंग का मुख्य लक्ष्य नेटवर्क में प्रत्येक नोड (जैसे राउटर) को नेटवर्क की पूरी जानकारी (टोपोलॉजी) प्रदान करना है। इसके आधार पर, प्रत्येक नोड स्वतंत्र रूप से किसी भी गंतव्य तक पहुंचने के लिए सबसे कम लागत वाला मार्ग (least-cost path) की गणना करता है।

  • सबसे कम लागत वाले मार्ग की गणना: लिंक-स्टेट प्रोटोकॉल, जैसे OSPF (Open Shortest Path First), हर राउटर को नेटवर्क के सभी लिंक की स्थिति और लागत (जैसे बैंडविड्थ, विलंबता) के बारे में जानकारी इकट्ठा करने की अनुमति देता है।
  • पूर्ण नेटवर्क दृश्य: प्रत्येक राउटर इस जानकारी का उपयोग करके एक पूर्ण नेटवर्क नक्शा बनाता है।
  • Dijkstra एल्गोरिथम: इस नक्शे का उपयोग करके, प्रत्येक राउटर Dijkstra जैसे एल्गोरिथम का उपयोग करके सभी गंतव्यों के लिए सबसे छोटा (सबसे कम लागत वाला) मार्ग ढूंढता है।

इसलिए, सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य प्रत्येक नोड को किसी भी गंतव्य के लिए सबसे कम लागत वाला मार्ग खोजने में सक्षम बनाना है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण

आइए देखें कि अन्य विकल्प लिंक-स्टेट रूटिंग के प्राथमिक उद्देश्य क्यों नहीं हैं:

  • बैंडविड्थ के आधार पर सबसे तेज़ मार्ग: जबकि बैंडविड्थ मार्ग की लागत को प्रभावित कर सकती है, लिंक-स्टेट रूटिंग केवल "सबसे तेज़" मार्ग पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करता है, बल्कि यह लागत के समग्र योग पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें विलंबता जैसे अन्य कारक भी शामिल हो सकते हैं। यह केवल एक कारक तक सीमित नहीं है।
  • IP पता असाइनमेंट प्रबंधित करना: IP पतों को असाइन करने का काम DHCP (Dynamic Host Configuration Protocol) जैसी सेवाओं का होता है, न कि रूटिंग प्रोटोकॉल का। रूटिंग प्रोटोकॉल केवल यह तय करते हैं कि डेटा को नेटवर्क पर कैसे भेजा जाए।
  • नोड्स के बीच सुरक्षित संचार सुनिश्चित करना: संचार की सुरक्षा सुनिश्चित करना एन्क्रिप्शन और प्रमाणीकरण प्रोटोकॉल (जैसे TLS, IPsec) का काम है। रूटिंग प्रोटोकॉल का मुख्य कार्य दक्षता के लिए सबसे अच्छे मार्ग खोजना है, सुरक्षा नहीं।

इस प्रकार, लिंक-स्टेट रूटिंग का मुख्य फोकस नेटवर्क टोपोलॉजी का ज्ञान और उसके आधार पर सबसे कम लागत वाले मार्गों की गणना करना है।

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