दिए गए अनुच्छेद से उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दें: विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति और सुविधा प्रदान की है। वह कार्य जो पहले घंटों में होते थे, अब मिनटों में पूरे हो जाते हैं। डिजिटल उपकरण, रोबोट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और मशीन लर्निंग जैसे नवाचारों ने हमारे जीवन को सरल तो बनाया है, लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया है- क्या इस तकनीकी प्रगति की चमक में हम अपनी संवेदनाओं की ऊष्मा को तो नहीं खो रहे?
आज के युग में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेजी से मानवीय विवेक से हटकर एल्गोरिदम और डेटा के आधार पर होने लगी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है जहाँ पहले केवल मानवीय अनुभव, भावना और अंतःप्रज्ञा की आवश्यकता होती थी- जैसे चिकित्सा निर्णय, न्याय व्यवस्था, या यहां तक कि मानसिक परामर्श। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या ये यंत्र उस भावनात्मक गहराई, सहानुभूति और नैतिकता को समझ सकते हैं जो एक मनुष्य की आत्मा का मूल गुण है? प्रौद्योगिकी की यह दौड़ निस्संदेह तेज़ है, परंतु यह उस आत्मिक धीमेपन को नहीं समझती जिसमें एक इंसान का मूल चरित्र विकसित होता है। जब निर्णय मात्र तर्क और आँकड़ों पर आधारित हो जाते हैं, तब करुणा, नैतिकता, सह-अस्तित्व जैसे मानवीय मूल्य गौण होने लगते हैं। समाज में जब संवेदनाएँ यंत्रों के हवाले कर दी जाती हैं, तो निर्णय भले ही कुशल हों, लेकिन उनमें आत्मा का अभाव होता है।
इसलिए यह आवश्यक है कि हम विज्ञान और तकनीक का उपयोग करें, पर अंधानुकरण न करें। हम यंत्रों से गति ले सकते हैं, पर दिशा अपने अंतःकरण से ही चुननी होगी। तकनीक हमारी सेवा में होनी चाहिए, न कि हमारे विवेक और संवेदना को विस्थापित करने वाली शक्ति के रूप में।
सच यही है कि यदि हम तकनीक के साथ मानवता का संतुलन नहीं बनाएँगे, तो हम एक उन्नत समाज तो बन सकते हैं, पर एक सहृदय समाज नहीं।
यह प्रश्न दिए गए अनुच्छेद पर आधारित है, जो विज्ञान और तकनीक, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करता है। अनुच्छेद इस बात पर जोर देता है कि जहाँ तकनीक ने जीवन को सरल बनाया है, वहीं यह मानवीय संवेदनाओं, भावनाओं और मूल्यों के क्षरण का मुद्दा भी उठाती है। लेखक चिंता व्यक्त करते हैं कि AI उन क्षेत्रों में प्रवेश कर रहा है जहाँ मानवीय अनुभव, अंतःप्रज्ञा और भावनात्मक गहराई आवश्यक है।
अनुच्छेद स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उन क्षेत्रों में भी अपनी पैठ बना रही है जहाँ पहले केवल मानवीय गुण जैसे अनुभव, भावना और अंतःप्रज्ञा की आवश्यकता होती थी। लेखक ऐसे कुछ उदाहरणों का उल्लेख करते हैं, जिनमें शामिल हैं:
इन क्षेत्रों को 'अत्यंत संवेदनशील' माना जा सकता है क्योंकि इनमें निर्णय लेते समय गहरी सहानुभूति, भावनात्मक समझ और नैतिक विचारों की आवश्यकता होती है। AI इन मानवीय गुणों को पूरी तरह से नहीं समझ सकता, भले ही वह तर्क और डेटा के आधार पर कुशल निर्णय ले सके।
आइए दिए गए विकल्पों पर विचार करें:
अनुच्छेद के आधार पर, लेखक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के 'मानसिक परामर्श' जैसे क्षेत्रों में प्रवेश को लेकर विशेष रूप से चिंतित हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये क्षेत्र मानवीय अनुभव, भावना, सहानुभूति और अंतःप्रज्ञा पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं, जिन्हें AI पूरी तरह से दोहरा नहीं सकता। इसलिए, लेखक के अनुसार, यह एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है।
Read the given figure and find the region representing persons who are educated and employed but not confirmed in job.

The magazine in which Mahatma Gandhi mentioned what he wanted the Constitution to do is:
Which gas shields the surface of the earth from ultraviolet radiation from the sun?
Which event is marked as an Intangible Cultural Heritage of Humanity by UNESCO?
Who has been conferred with the rank of the Commander of the Order of the British Empire in 2018?