UP Police SI 2020 Question Paper (17-Nov-2021) (Shift-2); Download PDF
UP Police SI 2020 Question Paper for 17-Nov-2021 Shift-2 is available here in PDF format and attempt it as a real exam test to assess your performance. The paper follows an objective-type format covering General Hindi, Law/Constitution, General Knowledge, and Numerical & Mental Ability. It comprises 160 questions for 400 marks, with each question carrying 2.5 marks and no negative marking.
Free
UP Police SI 2020 Question Paper (17-Nov-2021) (Shift-2)
120 Minutes
160 Questions
400 Marks
English, Hindi
Showing 1 - 5 of 40 questions
Page 1 of 8
Q1.
'सीता गाना गा रही है।' इस वाक्य में क्रिया का कौन-सा प्रकार है?
Q2.
किस शब्द में 'अनु' उपसर्ग नहीं है?
Q3.
अनुच्छेद पढ़कर, दिए गए सवालों के सही जवाब चुनिए :- अनुशासन बाह्य नहीं, भीतरी नियंत्रण है। वह भीतर से बाँधता है। यह भीतर से बाँधना धर्म से संभव है। धर्म मनुष्य को नैतिकता की ओर ले जाता है। वह व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार के कुछ ऐसे मापदंड प्रस्तुत करता है जो हमें उच्च संस्कार दे सके। 'स्व' को 'पर' से पीछे रखने पर ही ये उन संस्कारों को सध सकते हैं। उसके लिए आत्मतोषी और अपरिग्रही होना आवश्यक है। आधुनिक शिक्षा हमें आत्मबल नहीं देती। वह सूचना मात्र ही देती है। साहित्य और कला को हमने शिल्प तक सीमित कर दिया है। हमारा अध्ययन वैज्ञानिक हो गया है। वैज्ञानिकता का अर्थ है विश्लेषणात्मक अध्ययन। इस चीरा-फाड़ी में न साहित्य हाथ में पड़ता है, न कला, न धर्म। हम परिधि पर ही चक्कर लगाते रहते हैं। इसका फल यह है कि आज का शिक्षित मनुष्य भीतर से अशिक्षित है। उसके भीतर एक बड़ा शून्य है जो उसे बराबर कुरेदता रहता है और उसके अहं को उकसाता रहता है।
आधुनिक शिक्षा हमें अपने बल से वंचित रखती है क्योंकि
Q4.
अनुच्छेद पढ़कर, दिए गए सवालों के सही जवाब चुनिए :- अनुशासन बाह्य नहीं, भीतरी नियंत्रण है। वह भीतर से बाँधता है। यह भीतर से बाँधना धर्म से संभव है। धर्म मनुष्य को नैतिकता की ओर ले जाता है। वह व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार के कुछ ऐसे मापदंड प्रस्तुत करता है जो हमें उच्च संस्कार दे सके। 'स्व' को 'पर' से पीछे रखने पर ही ये उन संस्कारों को सध सकते हैं। उसके लिए आत्मतोषी और अपरिग्रही होना आवश्यक है। आधुनिक शिक्षा हमें आत्मबल नहीं देती। वह सूचना मात्र ही देती है। साहित्य और कला को हमने शिल्प तक सीमित कर दिया है। हमारा अध्ययन वैज्ञानिक हो गया है। वैज्ञानिकता का अर्थ है विश्लेषणात्मक अध्ययन। इस चीरा-फाड़ी में न साहित्य हाथ में पड़ता है, न कला, न धर्म। हम परिधि पर ही चक्कर लगाते रहते हैं। इसका फल यह है कि आज का शिक्षित मनुष्य भीतर से अशिक्षित है। उसके भीतर एक बड़ा शून्य है जो उसे बराबर कुरेदता रहता है और उसके अहं को उकसाता रहता है।
समाज में धर्म द्वारा अनुशासन इसलिए संभव है क्योंकि वह – समाज में धर्म द्वारा अनुशासन इसलिए संभव है क्योंकि वह -
Q5.
अनुच्छेद पढ़कर, दिए गए सवालों के सही जवाब चुनिए :- अनुशासन बाह्य नहीं, भीतरी नियंत्रण है। वह भीतर से बाँधता है। यह भीतर से बाँधना धर्म से संभव है। धर्म मनुष्य को नैतिकता की ओर ले जाता है। वह व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार के कुछ ऐसे मापदंड प्रस्तुत करता है जो हमें उच्च संस्कार दे सके। 'स्व' को 'पर' से पीछे रखने पर ही ये उन संस्कारों को सध सकते हैं। उसके लिए आत्मतोषी और अपरिग्रही होना आवश्यक है। आधुनिक शिक्षा हमें आत्मबल नहीं देती। वह सूचना मात्र ही देती है। साहित्य और कला को हमने शिल्प तक सीमित कर दिया है। हमारा अध्ययन वैज्ञानिक हो गया है। वैज्ञानिकता का अर्थ है विश्लेषणात्मक अध्ययन। इस चीरा-फाड़ी में न साहित्य हाथ में पड़ता है, न कला, न धर्म। हम परिधि पर ही चक्कर लगाते रहते हैं। इसका फल यह है कि आज का शिक्षित मनुष्य भीतर से अशिक्षित है। उसके भीतर एक बड़ा शून्य है जो उसे बराबर कुरेदता रहता है और उसके अहं को उकसाता रहता है।
संस्कारों को साधने के लिए आवश्यक है मनुष्य महत्व दे -