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UP Police SI 2020 Question Paper (16-Nov-2021) (Shift-3); Download PDF

UP Police SI 2020 Question Paper for 16-Nov-2021 Shift-3 is available here in PDF format and attempt it as a real exam test to assess your performance. The paper follows an objective-type format covering General Hindi, Law/Constitution, General Knowledge, and Numerical & Mental Ability. It comprises 160 questions for 400 marks, with each question carrying 2.5 marks and no negative marking.

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UP Police SI 2020 Question Paper (16-Nov-2021) (Shift-3)
120 Minutes
160 Questions
400 Marks
English, Hindi
Showing 1 - 5 of 40 questions
Page 1 of 8

Q1.

निम्न में से कौन-सा शब्द तद्भव नहीं है?

Q2.

“अन्याय सहकर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है, न्यायार्थ अपने बन्धु को भी, दण्ड देना धर्म है। इस तत्व पर ही कौरवों से, पाण्डवों का रण हुआ, जो भव्य भारतवर्ष के, कल्पान्त का कारण हुआ।।” में कौन-सा छन्द है?

Q3.

"ज्ञान राशि के संचित कोश का नाम साहित्य है।" यह किसकी प्रसिद्ध उक्ति है?

Q4.

जो विद्या की इच्छा रखता है, वह विद्यार्थी है। मनुष्य जीवन भर कुछ न कुछ सीखने की इच्छा रखता है इस दृष्टि से वह सदैव विद्यार्थी रहता है, किंतु स्थूल रूप से मानव-जीवन में विद्यार्थी काल बहुत लंबा समय नहीं है। यह मनुष्य के जीवन का स्वर्णिम काल है। विद्यार्थी जीवन हँसने-हँसाने का समय है। खेल-खेल में पढ़ाई का अभ्यास इसी उम्र में होता है। माता-पिता लाड-प्यार करते हैं परिवारजन स्नेह की वर्षा से अबोध मन को गुदगुदाते हैं। नित्य नए मित्र बनते हैं, छेड़-छाड़ चलती है। कभी-कभी बात बढ़ जाती है और नौबत मारपीट, हाथापाई तक आ जाती है परंतु सारा द्वेष, समस्त क्रोध, सारी कड़वाहट दूसरे पल ही नष्ट हो जाती है। आज जिससे लड़े, कल उसी के साथ बैठ मीठी-मीठी बातें करने का दृश्य दिखाई देता है। खाने-पीने और मौज उड़ाने का यह मस्ताना मौसम चाहे कितना छोटा क्यों न हो, लुभावना और सुहावना होता होता है। अतः यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन के इस स्वर्णिम काल का, जो लौट कर आनेवाला नहीं है, भरपूर लुब्ध उठाए।

विद्यार्थी-जीवन का आपसी लड़ाई-झगड़ा जल्दी समाप्त हो जाने का कारण है -

Q5.

जो विद्या की इच्छा रखता है, वह विद्यार्थी है। मनुष्य जीवन भर कुछ न कुछ सीखने की इच्छा रखता है इस दृष्टि से वह सदैव विद्यार्थी रहता है, किंतु स्थूल रूप से मानव-जीवन में विद्यार्थी काल बहुत लंबा समय नहीं है। यह मनुष्य के जीवन का स्वर्णिम काल है। विद्यार्थी जीवन हँसने-हँसाने का समय है। खेल-खेल में पढ़ाई का अभ्यास इसी उम्र में होता है। माता-पिता लाड-प्यार करते हैं परिवारजन स्नेह की वर्षा से अबोध मन को गुदगुदाते हैं। नित्य नए मित्र बनते हैं, छेड़-छाड़ चलती है। कभी-कभी बात बढ़ जाती है और नौबत मारपीट, हाथापाई तक आ जाती है परंतु सारा द्वेष, समस्त क्रोध, सारी कड़वाहट दूसरे पल ही नष्ट हो जाती है। आज जिससे लड़े, कल उसी के साथ बैठ मीठी-मीठी बातें करने का दृश्य दिखाई देता है। खाने-पीने और मौज उड़ाने का यह मस्ताना मौसम चाहे कितना छोटा क्यों न हो, लुभावना और सुहावना होता होता है। अतः यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन के इस स्वर्णिम काल का, जो लौट कर आनेवाला नहीं है, भरपूर लुब्ध उठाए।

विद्यार्थी जीवन मोहक है क्योंकि -

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