UP Police SI 2020 Question Paper (12-Nov-2021) (Shift-3); Download PDF
UP Police SI 2020 Question Paper for 12-Nov-2021 Shift-3 is available here in PDF format and attempt it as a real exam test to assess your performance. The paper follows an objective-type format covering General Hindi, Law/Constitution, General Knowledge, and Numerical & Mental Ability. It comprises 160 questions for 400 marks, with each question carrying 2.5 marks and no negative marking.
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UP Police SI 2020 Question Paper (12-Nov-2021) (Shift-3)
120 Minutes
160 Questions
400 Marks
English, Hindi
Showing 1 - 5 of 40 questions
Page 1 of 8
Q1.
देरिदा का जन्म कहाँ हुआ था?
Q2.
राम गया।' इस वाक्य में कौन-सा काल है?
Q3.
राम बहुत बहादुर है।' इस वाक्य में कौन-सा शब्द विशेष्य है?
Q4.
अनच्छेद पढ़कर दिए गए सवालों के सही जवाब चनिए :- हमारे देश भारत वर्ष में शोषक और शोषित वर्ग का संघर्ष आज भी जारी है। इन दोनों वर्गों के संघर्ष में भ्रष्टाचार का जन्म लेना स्वाभाविक है। देश की पूँजीवादी व्यवस्था में साधारण जनता बुरी तरह से पिसती जा रही है। विकास के समस्त साधन पूँजीपतियों के हाथों में कैद हैं। साधन विपन्नता एवं आर्थिक संकट ने मध्यम वर्ग एवं निम्न वर्ग को पराजित कर दिया है। देश का कर्मठ, ईमानदार, बुद्धिजीवी एवं सर्वहारा वर्ग मेहनत की कमाई करके भी दो जून की रोटी जुटा सकने में असमर्थ है। देश का सारा सरकारी तंत्र स्वार्थ लिप्सों के हाथों में फँस चुका है। नौकरशाही निरंकुश होकर भ्रष्टाचार में लिप्त हो गई है। शासन-व्यवस्था से जुड़ा हर आदमी स्वार्थ केंद्रित हो गया है। हर आदमी अपनी कार्य सिद्धि के लिए उन कथित भ्रष्टाचारियों का साथ देने के लिए विवश है। ईमानदारी एवं नैतिकता के बलबूते कोई भी काम करवा पाना असंभव ही है। जो व्यक्ति जितना झूठ बोलकर, जी हजूरी करके, अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल कर अपना काम करवा सकने की सामर्थ्य रखता है वह आज के युग में उतना सफल व्यक्ति माना जाता है। रिश्वतखोरी की बढ़ती प्रवृत्ति ने भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा दिया है। वस्तुतः अनैतिक तौर-तरीकों से किया गया प्रत्येक कार्य भ्रष्टाचार कहलाएगा।
किस प्रवृत्ति ने भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा दिया है?
Q5.
अनच्छेद पढ़कर दिए गए सवालों के सही जवाब चनिए :- हमारे देश भारत वर्ष में शोषक और शोषित वर्ग का संघर्ष आज भी जारी है। इन दोनों वर्गों के संघर्ष में भ्रष्टाचार का जन्म लेना स्वाभाविक है। देश की पूँजीवादी व्यवस्था में साधारण जनता बुरी तरह से पिसती जा रही है। विकास के समस्त साधन पूँजीपतियों के हाथों में कैद हैं। साधन विपन्नता एवं आर्थिक संकट ने मध्यम वर्ग एवं निम्न वर्ग को पराजित कर दिया है। देश का कर्मठ, ईमानदार, बुद्धिजीवी एवं सर्वहारा वर्ग मेहनत की कमाई करके भी दो जून की रोटी जुटा सकने में असमर्थ है। देश का सारा सरकारी तंत्र स्वार्थ लिप्सों के हाथों में फँस चुका है। नौकरशाही निरंकुश होकर भ्रष्टाचार में लिप्त हो गई है। शासन-व्यवस्था से जुड़ा हर आदमी स्वार्थ केंद्रित हो गया है। हर आदमी अपनी कार्य सिद्धि के लिए उन कथित भ्रष्टाचारियों का साथ देने के लिए विवश है। ईमानदारी एवं नैतिकता के बलबूते कोई भी काम करवा पाना असंभव ही है। जो व्यक्ति जितना झूठ बोलकर, जी हजूरी करके, अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल कर अपना काम करवा सकने की सामर्थ्य रखता है वह आज के युग में उतना सफल व्यक्ति माना जाता है। रिश्वतखोरी की बढ़ती प्रवृत्ति ने भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा दिया है। वस्तुतः अनैतिक तौर-तरीकों से किया गया प्रत्येक कार्य भ्रष्टाचार कहलाएगा।
हमारे देश के किस वर्ग के लोग मेहनत की कमाई से जीविका चलाने में असमर्थ हैं?