CUET UG 2025 Hindi Question Paper (May 13, 2025) Shift 1; Download PDF
CUET UG 2025 Hindi Question Paper for Shift 1, held on May 13, 2025, is now available for download in PDF format. This question paper includes a variety of questions designed to test the candidates' proficiency in the Hindi language. Candidates can download the PDF to review the questions and prepare effectively for future exams.
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CUET UG 2025 Hindi Question Paper (May 13, 2025) Shift 1
60 Minutes
50 Questions
250 Marks
English
Showing 1 - 5 of 50 questions
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Q1.
जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण उपकरण है। यह जीवन के कठिन समय में चुनौतियों का सामना करने का मार्ग प्रशस्त करती है। शिक्षण-प्रक्रिया के दौरान प्राप्त किया गया ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है। शिक्षा जीवन में बेहतर संभावनाओं को प्राप्त करने के अवसरों के लिए विभिन्न दरवाजे खोलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा बहुत से जागरुकता अभियान चलाये जा रहे हैं, जिससे सभी व्यक्तियों में समानता की भावना लाई जा सके तथा देश को विकास के पथ पर आगे ले जाया जा सके। आज के वैज्ञानिक एवं तकनीकी युग में शिक्षा की अहम भूमिका है। आजकल शिक्षा के स्तर को आगे बढ़ाने के लिए बहुत तरीके अपनाए जा रहे हैं। शिक्षा का पूरा तंत्र अब बदल गया है। आज १२वीं कक्षा के बाद दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से नौकरी करते हुए कोई भी पढ़ाई कर सकता है। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हम आसानी से किसी भी बड़े और प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में बहुत कम शुल्क पर प्रवेश ले सकते हैं। इसके अलावा अनेक छोटे-छोटे संस्थान भी विभिन्न कौशलों को विकसित करने वाले लघु अवधीय कौशलपरक पाठ्यक्रम चला रहे हैं। इन कौशलों में दक्षता प्राप्त कर व्यक्ति कम समय में ही अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।
गद्यांश के अनुसार जीवन में सफलता का अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है -
Q2.
जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण उपकरण है। यह जीवन के कठिन समय में चुनौतियों का सामना करने का मार्ग प्रशस्त करती है। शिक्षण-प्रक्रिया के दौरान प्राप्त किया गया ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है। शिक्षा जीवन में बेहतर संभावनाओं को प्राप्त करने के अवसरों के लिए विभिन्न दरवाजे खोलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा बहुत से जागरुकता अभियान चलाये जा रहे हैं, जिससे सभी व्यक्तियों में समानता की भावना लाई जा सके तथा देश को विकास के पथ पर आगे ले जाया जा सके। आज के वैज्ञानिक एवं तकनीकी युग में शिक्षा की अहम भूमिका है। आजकल शिक्षा के स्तर को आगे बढ़ाने के लिए बहुत तरीके अपनाए जा रहे हैं। शिक्षा का पूरा तंत्र अब बदल गया है। आज १२वीं कक्षा के बाद दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से नौकरी करते हुए कोई भी पढ़ाई कर सकता है। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हम आसानी से किसी भी बड़े और प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में बहुत कम शुल्क पर प्रवेश ले सकते हैं। इसके अलावा अनेक छोटे-छोटे संस्थान भी विभिन्न कौशलों को विकसित करने वाले लघु अवधीय कौशलपरक पाठ्यक्रम चला रहे हैं। इन कौशलों में दक्षता प्राप्त कर व्यक्ति कम समय में ही अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार द्वारा शिक्षा को कैसे बढ़ावा दिया जा रहा है ?
Q3.
जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण उपकरण है। यह जीवन के कठिन समय में चुनौतियों का सामना करने का मार्ग प्रशस्त करती है। शिक्षण-प्रक्रिया के दौरान प्राप्त किया गया ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है। शिक्षा जीवन में बेहतर संभावनाओं को प्राप्त करने के अवसरों के लिए विभिन्न दरवाजे खोलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा बहुत से जागरुकता अभियान चलाये जा रहे हैं, जिससे सभी व्यक्तियों में समानता की भावना लाई जा सके तथा देश को विकास के पथ पर आगे ले जाया जा सके। आज के वैज्ञानिक एवं तकनीकी युग में शिक्षा की अहम भूमिका है। आजकल शिक्षा के स्तर को आगे बढ़ाने के लिए बहुत तरीके अपनाए जा रहे हैं। शिक्षा का पूरा तंत्र अब बदल गया है। आज १२वीं कक्षा के बाद दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से नौकरी करते हुए कोई भी पढ़ाई कर सकता है। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हम आसानी से किसी भी बड़े और प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में बहुत कम शुल्क पर प्रवेश ले सकते हैं। इसके अलावा अनेक छोटे-छोटे संस्थान भी विभिन्न कौशलों को विकसित करने वाले लघु अवधीय कौशलपरक पाठ्यक्रम चला रहे हैं। इन कौशलों में दक्षता प्राप्त कर व्यक्ति कम समय में ही अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।
गद्यांश के अनुसार आज का युग किस प्रकार का है?
Q4.
जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण उपकरण है। यह जीवन के कठिन समय में चुनौतियों का सामना करने का मार्ग प्रशस्त करती है। शिक्षण-प्रक्रिया के दौरान प्राप्त किया गया ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है। शिक्षा जीवन में बेहतर संभावनाओं को प्राप्त करने के अवसरों के लिए विभिन्न दरवाजे खोलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा बहुत से जागरुकता अभियान चलाये जा रहे हैं, जिससे सभी व्यक्तियों में समानता की भावना लाई जा सके तथा देश को विकास के पथ पर आगे ले जाया जा सके। आज के वैज्ञानिक एवं तकनीकी युग में शिक्षा की अहम भूमिका है। आजकल शिक्षा के स्तर को आगे बढ़ाने के लिए बहुत तरीके अपनाए जा रहे हैं। शिक्षा का पूरा तंत्र अब बदल गया है। आज १२वीं कक्षा के बाद दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से नौकरी करते हुए कोई भी पढ़ाई कर सकता है। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हम आसानी से किसी भी बड़े और प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में बहुत कम शुल्क पर प्रवेश ले सकते हैं। इसके अलावा अनेक छोटे-छोटे संस्थान भी विभिन्न कौशलों को विकसित करने वाले लघु अवधीय कौशलपरक पाठ्यक्रम चला रहे हैं। इन कौशलों में दक्षता प्राप्त कर व्यक्ति कम समय में ही अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।
गद्यांश में प्रयुक्त 'अपने पैरों पर खड़ा होना' वाक्यांश का क्या अर्थ है?
Q5.
नाटक की तरह एकांकी में चरित्र अधिक नहीं होते। यहाँ पांच-छह से अधिक चरित्र नहीं होते। चरित्रों में भी केवल नायक की प्रधानता रहती है, अन्य चरित्र उसके व्यक्तित्व को अग्रसर करते हैं। यहाँ प्रतिनायक की कल्पना सामान्यतः नहीं रहती। नायक स्वयं अपने उत्थान-पतन के लिए उत्तरदायी है। एकांकी में विदूषक की कल्पना नहीं की जाती, क्योंकि एकांकी की कथावस्तु में इसके लिए स्थान ही नहीं होता। हास्य, व्यंग्य और विनोद का काम उसके चरित्रों के संवादों से ही चल जाता है। एकांकी के चरित्र को सजीव, व्यक्तिवादी और प्रभावशाली होना चाहिए। यहाँ चरित्र एक ऐसा बिंदु है, जो अपने चारों ओर वृत्त या घेरा बनाता जाता है। अतएव, घटनाओं के उत्थान-पतन की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती। चरित्र का निर्माण उसके संस्कार, मनोविज्ञान और वातावरण के अनुसार होता है। प्राचीन नाटकों की तरह यहाँ नायक या पात्रों का कोई बना-बनाया साँचा नहीं होता। नायक के लिए सर्वगुणसंपन्न होना भी आवश्यक नहीं। वह तो एक साधारण व्यक्ति है, जो साधारण लोगों की तरह सुख-दुःख के बीच जीवन बिताता है। अधिकतर एकांकियों में चरित्र की मानसिक स्थिति द्वंद्वात्मक होती है। उसे अंतर्द्वन्द्व और बाह्यद्वंद्व से संघर्ष करता हुआ दिखाया जाता है।